हुक्मरानों बंद करो ये ख़ुदमुख्तारियां
शोला बनने लगी हैं अब चिनगारियां
ज़िंदगी का दम यहाँ कैसे भरें हम
हर तरफ फैला दीं तुमने दुश्वारियां
अब न सपनों की यहाँ पर बात छेड़ो
सुलगती हैं हमारे मन में लाचारियाँ
इस वतन को तोड़ने की सोच भी
बहुत भारी पड़ेंगी ये गैरजिम्मेदारियां
समय रहते सोच को बदलो नहीं तो
हम हैं और अब हमारी कारगुजारियां
@@@०९-जुलाई-२०११@@@
(श्रवण कुमार उर्मलिया तिवारी)
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