Sunday, August 28, 2011

अब हमारे हाथों में वो हमारा संविधान है...

बंदिशों का न कहीं अब कोई नामोनिशान है
यारो,यह इस दौर का एक पुख्ता बयान है

संसद में क़ैद था जो लोकतंत्र के नाम पर
अब हमारे हाथों में वो हमारा संविधान है

आम ने फिर फेर दिया पानी मनसूबों पर
देश के दुश्मनों की बड़ी सांसत में जान है

एकता ने फिर दिखाया है वो अपना हुनर
भेड़ियों के चगुल से देखो छूटी कमान है

@@@@श्रवण@@@@ २८/०८/२०११

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