Tuesday, November 29, 2011

सुबह का इंतज़ार ज्यों-ज्यों बढ़ा...

सुबह का इंतज़ार ज्यों-ज्यों बढ़ा
रात का विस्तार भी त्यों-त्यों बढ़ा

उम्र का अधिकार ज्यों-ज्यों बढ़ा
व्यथा का आकार भी त्यों-त्यों बढ़ा

समय का प्रतिकार ज्यों-ज्यों बढ़ा
विरह का संसार भी त्यों-त्यों बढ़ा

पीर का उपचार ज्यों-ज्यों बढ़ा
दर्द का अम्बार भी त्यों-त्यों बढ़ा

***श्रवण***

Sunday, November 27, 2011

मेरे इस शहर का भी मिज़ाज बदल जायेगा...

तेरी आँखों में जो सपनो का घर बसाएगा
तेरी मुस्कान में वो बहारों का पता पायेगा
जब भी देखेगी तू इस ओर मेहरबां होकर
मेरे इस शहर का भी मिज़ाज बदल जायेगा

***श्रवण***

Friday, November 25, 2011

बचा लो प्यार के जज्बात,काम आएंगे...

बचा लो प्यार के जज्बात,काम आएंगे
कभी तनहाइयों में ये तुम्हे सहलायेंगे

बहुत परछाइयों पर ऐतबार मत करना
यही कमज़ोर लम्हे दिल को यूँ तड़पाएंगे

जलो गर जल सको तुम रोशनी बनकर
कि सपने ज़िंदगी को गले से लगायेंगे

***श्रवण***

Thursday, November 24, 2011

कभी किसी का तुम इंतज़ार मत बनना...

कभी किसी का तुम इंतज़ार मत बनना
कभी किसी के लिए बेकरार मत बनना

बहुत आसां नहीं है ये ज़िन्दगी का सफ़र
बस इतना याद रहे,गुनहगार मत बनना

***श्रवण***

Wednesday, November 23, 2011

मायूस आशिकों का यतीमखाना था...

कुछ तो पीने का भी बहाना था
कुछ इस दिल को भी बहलाना था

एक साकी हज़ार मयकश थे जहाँ
मायूस आशिकों का यतीमखाना था

मिली शराब भी रंजो-गम के साथ-साथ
बहुत दिनों से खाली मेरा पैमाना था

***श्रवण***

Tuesday, November 22, 2011

संध्या का झुटपुट,बगिया का कोना...

संध्या का झुटपुट,बगिया का कोना...
लगता है कितना अच्छा
तेरी-मेरी बातों का
अर्थहीन होना...

***श्रवण***

Sunday, November 20, 2011

खून की पहचान...

आँखों से जो बहता है उसे तुम अश्क कहते हो
अभी हासिल नहीं है खून की पहचान तुमको

***श्रवण***

Tuesday, November 1, 2011

जितनी बड़ी रस्में,उतने घायल रिश्ते हैं...

किसी भी बात पर हम देर तलक हँसते हैं
छोटे-बड़े घाव अपने इसी तरह रिसते हैं

अपनी वासनाओं के अँधेरे में भटके हुए
हव्वा नहीं,हम तो आदम के फ़रिश्ते हैं

रस्मों और रिश्तों के आईने में झांकिए
जितनी बड़ी रस्में,उतने घायल रिश्ते हैं

बेड़ियों में कसे दो हाथ मुक्ति चाहते हैं
जितना ही चीखिये,उतना ही ये कसते हैं

रह रहे हैं एक वीराने शहर में,हम यारो,
आँखों में सुधियों के कई गाँव बसते हैं

***श्रवण*** (१२ दिसम्बर,१९७७)