मेरे पलाशवन
Tuesday, November 22, 2011
संध्या का झुटपुट,बगिया का कोना...
संध्या का झुटपुट,बगिया का कोना...
लगता है कितना अच्छा
तेरी-मेरी बातों का
अर्थहीन होना...
***श्रवण***
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment