Tuesday, November 29, 2011

सुबह का इंतज़ार ज्यों-ज्यों बढ़ा...

सुबह का इंतज़ार ज्यों-ज्यों बढ़ा
रात का विस्तार भी त्यों-त्यों बढ़ा

उम्र का अधिकार ज्यों-ज्यों बढ़ा
व्यथा का आकार भी त्यों-त्यों बढ़ा

समय का प्रतिकार ज्यों-ज्यों बढ़ा
विरह का संसार भी त्यों-त्यों बढ़ा

पीर का उपचार ज्यों-ज्यों बढ़ा
दर्द का अम्बार भी त्यों-त्यों बढ़ा

***श्रवण***

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