सुबह का इंतज़ार ज्यों-ज्यों बढ़ा
रात का विस्तार भी त्यों-त्यों बढ़ा
उम्र का अधिकार ज्यों-ज्यों बढ़ा
व्यथा का आकार भी त्यों-त्यों बढ़ा
समय का प्रतिकार ज्यों-ज्यों बढ़ा
विरह का संसार भी त्यों-त्यों बढ़ा
पीर का उपचार ज्यों-ज्यों बढ़ा
दर्द का अम्बार भी त्यों-त्यों बढ़ा
***श्रवण***
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