Wednesday, February 1, 2012

आईना उनको दिखाया तो बुरा मान गए...

वो जो हमको देते थे नसीहतें दिन-रात
आईना उनको दिखाया तो बुरा मान गए

उजले कपड़ों में जो ख़ुद को यूँ छिपाए थे
उन सफ़ेदपोशों को हम भी पहचान गए

ज़िंदगी इस क़दर उलझी कि यहाँ,यारो
बहुत सम्हाला पर वो सारे अरमान गए

जिसने आवाज़ उठाई जुल्मों के ख़िलाफ़
ऐसे हर सख्श पर हम यहाँ कुर्बान गए

जिन निगाहों से हम घायल हुए बार-बार
लगता है उन नज़रों के वे तीर-कमान गए
***श्रवण***

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