मेरे पलाशवन
Thursday, February 9, 2012
जितना ऊँचा क़द,हैं उतने ही छोटे लोग
जितना ऊँचा क़द,हैं उतने ही छोटे लोग
लुढ़क रहे हर ओर,बिन पेंदी के लोटे लोग
शरम-हया की बातें सारी बेमानी लगतीं
नक़ली चमक दिखाते अपनी खोटे लोग
***श्रवण***
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