कि उनके मुंह पे कैसे कह दें,उनमे भी वफ़ा नहीं
बहुत हैं हम मगर इतने भी हम तो बेवफ़ा नहीं
उधर हालात बद से और बदतर हो रहे दिन-रात
तआज्जुब ये कि अपने आप पे हम भी ख़फा नहीं
यहाँ बेख़ौफ़ हो कर जिसका चाहे दिल चुराइए
इधर कानून में इस ज़ुर्म की कोई दफ़ा नहीं
ज़माने के मुक़ाबिल हम खड़े हो जाएँ तो लेकिन
हिसाबी दिल मेरा सोचे कि सौदे में नफ़ा नहीं
हवाले कर दिया ख़ुद को तेरे और बाद में जाना
जफ़ा करने के लायक भी कहीं तुझमे जफ़ा नहीं
***श्रवण कुमार उर्मलिया तिवारी***
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