तेरी तनहाइयों का गर ज़िम्मेदार हूँ मैं
अब भी आ जा कि तेरा इंतज़ार हूँ मैं
मन के आँगन में तेरा प्यार गवाही देगा
तेरे दिल की चाहतों का गुनहगार हूँ मैं
दर्द अंगारा बन के हमको रोशनी देगा
तेरे जख्मों से मगर खूब शर्मसार हूँ मैं
तेरे सपनों में मुझे थोड़ी जगह दे देना
हिस्सा बनना है मुझे तेरा,बेक़रार हूँ मैं
***श्रवण***
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