Sunday, February 19, 2012

हिमाक़त हो गई है

ये नींद आंखों से मेरी क्यूं दूर हो गयी ?
अबे ! गोली इक नींद की खा तो सही !

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क्यों बार-बार मेरा रास्ता काटता है तू ?
ये काम बिल्ली को करने दे न,यार !

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यह हिमाक़त हो गई है मुझसे मेरी दिलरुबा
गिर पड़ा हूँ मैं तेरी रुखसार की उन खाईयों में
***श्रवण***

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कहीं उलझ न जाये फिर से ज़िंदगी, यारो
उनके बालों के ये ख़म मुझको दुआ देते हैं
***श्रवण***

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