सियासती किरदारों का अंदाज़ वहशियाना है
इनका ये रुख सालों से खूब जाना-पहचाना है
रहबरी को भूलकर ख़ुद हो गए हैं राहजन
अपना ये वतन कितना लगता बेगाना है
लूट रहे अस्मिता देखो अपने ही चमन की
जिससे जुड़ा इनका ख़ुद का आबो-दाना है
नोंच कर खा रहे हैं,इंसानी जिस्मों को
इनके जिस्मों में कोई हैवानी ताना-बाना है
चुनकर के आम ने ही बनाया है खास इन्हें
जो इनकी ख़ातिर महज़ इक वोटर पुराना है
(श्रवण कुमार उर्मलिया तिवारी)
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