Wednesday, June 15, 2011

दिल में इक ख़ुमार-सा है...

दिल में इक ख़ुमार-सा है
जो अनकहे प्यार-सा है

रोज आते हैं वो ख़्वाबों में
समां मौसमे-बहार-सा है

चाँद उतरा है इस झील में
मिलने का इंतज़ार-सा है

हवाओं में यूँ कशिश पाई
जुल्फ़ों से कारोबार-सा है

वो हंसी साथ,वो हंसी बातें
मीठे सपनों से,करार-सा है

ऐसे अंदाज़ से उठी वो नज़र
फिजां में इक गुबार-सा है

हम हैं या उनकी जुस्तजू है
यह नशा ख़ुशगवार-सा है

(श्रवण कुमार उर्मलिया तिवारी)
१६/०५/२०११

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