Friday, June 10, 2011

जिन्हें रोटी चाहिए,उन्हें तुम नारे देते हो...

जिन्हें रोटी चाहिए,उन्हें तुम नारे देते हो
अरे धूर्तों,इस देश को क्यों मारे देते हो?

लोगों की भूख पर सेंकते हो रोटियां
जले हुए पर नमक के फुहारे देते हो?

जो भी जुड़ा है इस देश की ज़मीन से
उसे ही क्यों भला हमेशा बिसारे देते हो?

वो भला क्या जानें सलीब का मतलब
उनके लिए फांसी के सहारे देते हो ?

लो संभल जाओ, सियासत के गिद्धों,वर्ना
कहोगे क्यों हमारी इज्ज़त उतारे देते हो!

(श्रवण कुमार उर्मलिया तिवारी)

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