जो भी इस जिंदगी में हालात के मारे मिले
उन्ही लोगों में हमें बेसहारों के सहारे मिले
जिसने भी प्यार का इज़हार किया है खुलकर
उनकी आँखों में जो भी सपने थे, कुंवारे मिले
वो जिन्हें छू सकी न परछाइयों की बाजीगरी
ऐसे ख़ुद्दार कड़ी धूप में जीवन को संवारे मिले
वो जो फ़रयाद की कोशिश में जुटे हैं हर पल
उन्हें तसल्लियों के फिर से कुछ शरारे मिले
हमने हर लफ्ज़ को न जाने कितनी बार पढ़ा
जितने भी मुफ़लिसी में ख़त हमें तुम्हारे मिले
***श्रवण कुमार उर्मलिया तिवारी***
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