(१)
भोरे कुहकी कोयल रानी
कैसी मीठी तान,
आज छुआ मन के अधरों ने
कोई मीठा पान....
(२)
खुले बाल लेकर पुरवैया
चढ़ी नीम की डार,
दोपहर बाद भरा यौवन
तो लाँघ गयी दीवार...
(३)
चितवन में आशा की झिलमिल
चेहरे पर खुशियों का हास,
बाँहों की आतुरता कहती
बंधन का छू लें आकाश...
***श्रवण***
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