Wednesday, December 28, 2011

अपनी ज़िंदगी भी आजकल...

(एक)
ख़ाली वक़्त में यूँ चुपचाप
बैठना नहीं अच्छा,
हुज़ूर!शिकार कीजिये कि
दिल हमारे पास है
और
तीर आपके पास...

(दो)
अपने घर से उसने हमें
लौटाया बार-बार,
हर बार यह कहकर
कि अभी जाइये,
फिर आइयेगा
हम करेंगे इंतज़ार..

(तीन)
जहाँ उन आँखों में
सुधियाँ बहुत गहरी हुई होंगी,
अपनी ज़िंदगी भी आजकल
वहीँ ठहरी हुई होगी...

***श्रवण***

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