मेरे पलाशवन
Monday, January 2, 2012
सबके सीने में अभी तपिश बहुत बाकी है
सबके सीने में अभी तपिश बहुत बाकी है
उनके मशालों के लिए आग बांटनी होगी
जहाँ दीवारें नहीं,उनके लिए छत के पयाम
ये खाइयाँ भी वगावत से पाटनी होंगी
***श्रवण***...
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment