(एक)
मधुर गीतों से भरा है प्यार,आओ झूम लें
नेह के इन निर्झरों को मन-प्राणों से चूम लें
अब न बैरागी रहेगा मन हमारा, प्रण करें
अनुरागों की बगिया में चलो फिर घूम लें
(दो)
नयनों के द्वार खोले आ गयी सुबह
सुधियों में प्यार घोले आ गयी सुबह
भूल कर सपनों की बातें,ऐ भोले मन
किरणों संग झूम ले, भूल जा विरह
***श्रवण***
No comments:
Post a Comment