मेरे पलाशवन
Monday, January 9, 2012
अब हमारे यूँ बहके हुए ये अंदाज़ रोकते हो...
दबे-कुचले लोगों की मुखर आवाज़ रोकते हो
उड़ने को बेताब परिंदों की परवाज़ रोकते हो
तुम पर कब होता था गिड़गिड़ाने का असर
अब हमारे यूँ बहके हुए ये अंदाज़ रोकते हो
***श्रवण***
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