Saturday, January 14, 2012

बूंद-बूंद कर भर गया घड़ा...

(एक)
बेटी अब बड़ी हो गई
अपने पैरों पर खड़ी हो गई,
मां ने कहा बाप से-
यह भी परेशानी की
एक कड़ी हो गई.

(दो)
बूंद-बूंद कर भर गया घड़ा
देखते-देखते बेटा हो गया बड़ा,
मां-बाप को अब ज़िंदा जलाएगा-
उनके मरने पर
उन्हें आग भी लगाएगा.

(तीन)
वे देते नहीं भूखे को भी
कभी कोई दान,
पर अमर होने के क्रम में-
कर रहे हैं
मरणोपरांत दृष्टिदान.
***श्रवण***

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