Saturday, January 21, 2012

दिल में रहती है इक मीठी कसक आठों पहर

दिल में रहती है इक मीठी कसक आठों पहर
उग रहा है आंगन में अब दीवारों का ज़हर
सुधियों में बहुत चुभता है वह वक़्त-ए-सफ़र
अपने ही घर में कहीं होता था वो अपना घर
***श्रवण***

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