Thursday, January 12, 2012

शाम का इतिहास और वो अमिट यादें...

(एक)
तुम्हारी आँखों से थोड़ा शराबी तो हो लूँ
तुम्हारे ओठों से थोड़ा गुलाबी तो हो लूँ
ज़रा देर और तुम ठहर जाओ मेरे पास
कुछ तुम बोलो और कुछ मैं भी बोलूं.

(दो)
हमें देखे बिना वे बहुत बेक़रार हो गए
हाथ जो थामा तो प्यार ही प्यार हो गए
पहले होते थे वे मधुर बहार पर नाराज़
अब तो वे ख़ुद बहार ही बहार हो गए

(तीन)
शाम का इतिहास और वो अमिट यादें
प्यार का मधुमास और वे गीत-बातें
साथ सम्मुख बैठकर भी मौन हम-तुम
क्यों नहीं वे पल अछूते हम भूल पाते
***श्रवण***

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