Friday, January 13, 2012

हर चेहरा ख़ूबसूरत हर नाम सुन्दर है

(एक)
हर चेहरा ख़ूबसूरत
हर नाम सुन्दर है,
यह दुनिया भी क्या
सिर्फ़ मुखौटों का घर है?

(दो)
वह कैसे बंटा पाती
तुम्हारी उदासी,
वह तो ख़ुद थी
जन्म-जन्मांतरों की प्यासी.

(तीन)
माना कि सच्चाई में
बहुत दम है,
किन्तु आजकल वह
अपने-आप में ही
कितनी कम है!
***श्रवण***

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