लोग भी क्यों प्यार-व्यार करते हैं
नक़ली रिश्तों से कारोबार करते हैं
वो अपने शीशे सम्हालकर रखना
लोग यहाँ पत्थर से वार करते हैं
वो जो करते हैं रोज सत्य की बातें
अंधेरों में झूठ का प्रचार करते हैं
इतने घपले किये हैं मान्यवर ने
कि अब समाज का सुधार करते हैं
कर दिया है जबसे नेत्रदान,यारो
वे किडनियों का व्योपार करते हैं
जिनके कतरे गए हैं पंख वे भी
उड़ानों पे खूब ऐतबार करते हैं
ज़िंदगी है कि है ये कोई तिलिस्म
हम भी बाज़ीगरी से प्यार करते हैं
***श्रवण***
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