मेरे पलाशवन
Tuesday, January 24, 2012
अब सियासत हमें बहलाने के लिए है
रोटी का कानून यहाँ भरमाने के लिए है
अपने अरमान ही बस जलाने के लिए हैं
रोशनी के राहबर कभी होते थे यहाँ पर
अब सियासत हमें बहलाने के लिए है.
***श्रवण***
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