मेरे पलाशवन
Tuesday, January 31, 2012
पीड़ा को आस्तीन के सापों सा न पालिए...
दर्द सांसों में बसा हो तो उसे निकालिए
पीड़ा को आस्तीन के सापों सा न पालिए
इतनी ख़ुशियाँ हैं यहाँ ज़िंदगी में,यारो
उन्हें चुनिए,गुनिये,सहेजिये,सम्हालिए
***श्रवण***
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