Saturday, May 7, 2011

है चिरप्रतीक्षित वही चांदनी रात...

है चिरप्रतीक्षित वही

चांदनी रात,

झिलमिल तारों से

पूरा व्योम लिखा-

जैसे तेरी-मेरी बात...


है इतनी धवल उजास,

स्वप्नलोक सी दुनिया में

दूर दूर तक सूना सब कुछ

फिर भी कोई पास-


है ये मधुर बयार या

ख़ुशबू की बारात...


नींद नहीं तिरती आँखों में,

मिलन-यामिनी लेकर आई

सघन उड़ानें प्यार-स्नेह की

चाहत की पाखों में-


करते है मनुहार समय से

हो न जल्दी प्रात...


अधरों के आश्वासन अनगिन,

मौन-निमंत्रण नयनों में

कितना अच्छा हो गर

रुक जाएँ पल-छिन-


विजय सुनिश्चित अनुरागों की

अब न होगी मात..


झिलमिल तारों से

पूरा व्योम लिखा

ज्यों तेरी-मेरी बात...


(सुपर मून को समर्पित.. १९/०३/२०११)

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