है चिरप्रतीक्षित वही
चांदनी रात,
झिलमिल तारों से
पूरा व्योम लिखा-
जैसे तेरी-मेरी बात...
है इतनी धवल उजास,
स्वप्नलोक सी दुनिया में
दूर दूर तक सूना सब कुछ
फिर भी कोई पास-
है ये मधुर बयार या
ख़ुशबू की बारात...
नींद नहीं तिरती आँखों में,
मिलन-यामिनी लेकर आई
सघन उड़ानें प्यार-स्नेह की
चाहत की पाखों में-
करते है मनुहार समय से
हो न जल्दी प्रात...
अधरों के आश्वासन अनगिन,
मौन-निमंत्रण नयनों में
कितना अच्छा हो गर
रुक जाएँ पल-छिन-
विजय सुनिश्चित अनुरागों की
अब न होगी मात..
झिलमिल तारों से
पूरा व्योम लिखा
ज्यों तेरी-मेरी बात...
(सुपर मून को समर्पित.. १९/०३/२०११)
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