रोशनी की राह जो रोके खड़े हैं
जिंदगी भर हम उन्ही से लड़े हैं
चाह थी,सब को मौका मिल सके
पर सियासत ने यहाँ ताले जड़े हैं
जिंदगी के ख़्वाब सच्चे हो सकें
हम हैं छोटे इसलिए सपने बड़े हैं
जो बहुत रहते थे अक्सर सुर्ख़ियों में
आज वे सब शर्म से नीचे गड़े हैं
बंधनों के ज़हर में खोये हुए हैं
जितने भी रिश्ते मिले सब सड़े हैं
चढ़ गए हैं मंच पर चमचे यहाँ
और हम सब हाशिए में पड़े हैं
चीख़ने से कुछ नहीं होता यहाँ
फोड़ दो इनको ये चिकने घड़े हैं
(०५/०३/२०११)
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