मेरे पलाशवन
Monday, May 30, 2011
क़ैद रह गए पीले फूल किताबों में ...
मन की बात मन में ही,हाय रह गयी
वैसे जबान जाने क्या-क्या कह गयी
क़ैद रह गए पीले फूल किताबों में
अपनी काया विरह-वेदना सह गयी
सुधियों की दीवार हमारी थाती थी
रिश्तों की आंधी में देखो ढह गयी
(श्र.कु.उर्मलिया तिवारी)
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