फूल और काँटों के सम्बन्ध-सी
ज़िन्दगी,तू निराला के छंद-सी
बंधनों के ज़हर में खोई हुई
ह्रदय से दर्द का अनुबंध-सी
विवशता के द्वीप में याचक बनी
गहन तम में रोशनी के गंध-सी
प्रारब्ध की रक्तरंजित लेखनी से
आत्मा पर व्यथा के निबंध-सी
बंदिशों की क़ैद में पीड़ा लिए
समय पर सुधियों की धुंध-सी
भटकनों की आग में तपती रही
मरुस्थल में प्यास के तटबंध-सी
भवना की शांत सुप्त घाटियों में
डूबकर ही मुक्ति के प्रबंध-सी
(श्रवण कुमार उर्मलिया तिवारी)
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