Friday, May 6, 2011

तेरी ऑंखें हैं खूब नाम,सकी!

तेरी ऑंखें हैं ख़ूब नम,साक़ी!

ला पिला दे अपने ग़म,साक़ी!


आज की रात इल्तिजा है मेरी,

टूट जाने दे सब भरम, साक़ी!


हमने देखे है यूँ वीराने कई,

तेरे चेहरे से मगर कम,साक़ी!


तेरी महफ़िल में चिराग़ों के लिए,

हमने भी खायी है क़सम, साक़ी!


अपने क़ाबू में दिल नहीं रहता,

तेरी चाहत में इतना दम,साक़ी!


इश्क़ दरिया है, प्यार की लहरें,

बह गए तेरे साथ हम, साक़ी!


ज़िंदगी इस क़दर है उलझी हुई,

तेरे बालों में जितने ख़म,साक़ी!

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