Saturday, May 7, 2011

मां

एक चाभी का गुच्छा

शांति/नम्रता/डांट/फटकार

अविश्वास की कंटीली झाड़ियाँ

ढेर सारे आंसू/आहें

लाल बिंदी/भरी हुई मांग

जिस्मानी रिश्तों के अजगर

ढेर सारे बच्चे/ममता/स्नेह

और एक निकम्मा पति--

उस मां के पास इनके सिवा

और कुछ नहीं था...




सूनी-सूनी आँखों में

भूख की हकीक़त/प्यास के सपने

खिचड़ी बाल/धूल सने पैर

रोना-धोना और

फटे कपड़ों की इज्ज़त--

उस घर में

बच्चों की दौलत थी...




खटिया पर तिलमिलाते

खांसी के दौर

आज के उत्तर/कल के सवाल

धार्मिक किताबें/पुराना चश्मा

सरौता/चुनौटी/तुलसी की माला

जिम्मेदारियों का फैला तालाब

तैर जाने की तमन्ना

डूब जाने का भय--

उस घर का बाप

किनारे खड़ा था...




वह परिवार क़ैद था आंगन में

और मां की डोर से

बांधे हुए था

आंगन को...



(श्रवण कुमार उर्मलिया तिवारी)

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