एक चाभी का गुच्छा
शांति/नम्रता/डांट/फटकार
अविश्वास की कंटीली झाड़ियाँ
ढेर सारे आंसू/आहें
लाल बिंदी/भरी हुई मांग
जिस्मानी रिश्तों के अजगर
ढेर सारे बच्चे/ममता/स्नेह
और एक निकम्मा पति--
उस मां के पास इनके सिवा
और कुछ नहीं था...
सूनी-सूनी आँखों में
भूख की हकीक़त/प्यास के सपने
खिचड़ी बाल/धूल सने पैर
रोना-धोना और
फटे कपड़ों की इज्ज़त--
उस घर में
बच्चों की दौलत थी...
खटिया पर तिलमिलाते
खांसी के दौर
आज के उत्तर/कल के सवाल
धार्मिक किताबें/पुराना चश्मा
सरौता/चुनौटी/तुलसी की माला
जिम्मेदारियों का फैला तालाब
तैर जाने की तमन्ना
डूब जाने का भय--
उस घर का बाप
किनारे खड़ा था...
वह परिवार क़ैद था आंगन में
और मां की डोर से
बांधे हुए था
आंगन को...
(श्रवण कुमार उर्मलिया तिवारी)
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