मेरे पलाशवन
Monday, May 30, 2011
रेत का संसार हमारे सामने है..
रेत का संसार हमारे सामने है
सूखता घरबार हमारे सामने है
मृत होती हैं मधुर हवाएं देखो
सूना विस्तार हमारे सामने है
अब भी गर हम सम्हले नहीं
मृत्यु का कारोबार हमारे सामने है
(श्रवण कुमार उर्मलिया तिवारी)
1 comment:
Alpana Verma
June 4, 2012 at 11:22 AM
बहुत अच्छा लिखा है..
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बहुत अच्छा लिखा है..
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