Monday, May 9, 2011

मैं सुबह-ओ-शाम घिरा रहता हूँ खुशबू से तेरी...

जो दिल की बात ही न समझे, वो नज़र क्या है
गर बाकी है कहीं कुछ कसर, वो कसर क्या है

मैं सुबह-ओ-शाम घिरा रहता हूँ खुशबू से तेरी
कुछ तो है बात अपने बीच,वो मगर क्या है

कर तो दूँ ज़िंदगी को अपने तेरे नाम,जब चाहूँ
पहले मालूम तो हो, होगा असर,वो असर क्या है

हर सफ़र वीरान थे और मंजिलें ख़ामोश थीं
अब तेरे बगैर कटे कोई सफ़र,वो सफ़र क्या है

मैं हूँ गर रेत सा प्यासा तो है तू इक दरियादिल
जो बुझा पाये मेरी प्यास बता ,वो लहर क्या है

No comments:

Post a Comment