Friday, May 6, 2011

जहाँ सागर हैं वहीँ तूफान होंगे


जहाँ सागर हैं वहीँ तूफान होंगे

आग सीने में लिए इंसान होंगे

जितने गहरे दर्द,अब सागर कहाँ

वो सफ़ीने बेवजह हैरान होंगे

खो गयी लहरें,किनारे प्यास से

मेरे घर में इन दिनों मेहमान

मांझियों के गीत बोझिल हो गए

मछलियों के देश भी वीरान होंगे

बह रहा हूँ एक दरिया की तरह

कोई सागर तो मेरी पहचान होंगे

(११ अक्टूबर,१९८७)

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