Friday, May 6, 2011

तेरी तनहाइयों का गर ज़िम्मेदार हूँ मैं...

तेरी तनहाइयों का गर ज़िम्मेदार हूँ मैं

अब भी आजा कि तेरा इंतज़ार हूँ मैं


दर्द अंगारा बनके हमको रोशनी देगा

तेरे ज़ख्मों से मगर खूब शर्मसार हूँ मैं


तेरे रोने से जो सावन कि घटायें बरसें

दिल से उन अश्कों का गुनहगार हूँ मैं


मन के आंगन में तेरा प्यार गवाही देगा

कैसे बतलाऊं कि अब तेरा क़र्ज़दार हूँ मैं


अपने सपनों में मुझे थोड़ी जगह दे देना

हिस्सा बनना है मुझे तेरा, बेक़रार हूँ मैं

(श्रवण कुमार उर्मलिया तिवारी)

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