Friday, May 6, 2011

की हर चेहरा है यहाँ पर दर्द का इश्तेहार...

कितनी मुस्तैद हो गयी है अब हमारी सरकार

कि हर चेहरा है यहाँ पर दर्द का इश्तेहार


हर तरफ फैली चुनावी तिकड़में-नारेबाजियां

सियासत भी है अब महज एक कारोबार


इस कदर हालात बदतर औ बेकाबू हुए

क्या किसी को भी है यहाँ कोई सरोकार


गाँधी-नेहरु-तिलक ने सींचा इस धरती को

भ्रष्टाचार यहाँ का अब सबसे अहम् त्यौहार


कुछ न कुछ तो अब करना है मेरे दोस्तों

पर लाएं कहाँ से एक नहीं अन्ना हजार


(श्रवण कुमार उर्मलिया तिवारी)

०८/०४/२०११

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